दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले महाराष्ट्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने राज्य पुलिस और राज्य सरकार पर पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने और दबाने का सीधा आरोप लगाया है।
प्रेस वार्ता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए अपनी बात रखते हुए दिपके ने पुलिस द्वारा जारी किए गए नोटिसों को लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।
10 अक्टूबर प्रदर्शन से पहले नोटिस जारी होने पर छिड़ा विवाद
अभिजीत दिपके के अनुसार, महाराष्ट्र पुलिस विशेष रूप से चंद्रपुर और आसपास के जिलों में सीजेपी कार्यकर्ताओं को आधिकारिक नोटिस जारी कर रही है। इन नोटिसों के तहत कार्यकर्ताओं से दिल्ली यात्रा के खर्चों के स्रोत की जानकारी मांगी जा रही है और उन्हें प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी दी जा रही है।
पुलिस की ओर से दिए जा रहे नोटिसों में इस बात का उल्लेख है कि दिल्ली में होने वाला यह आंदोलन हिंसक रूप ले सकता है।
दिपके ने पुलिस की इस अग्रिम आशंका पर सवाल खड़े करते हुए कहा:
“पुलिस को समय से पहले यह कैसे अंदाजा लग गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो जाएगा? क्या प्रशासन की ओर से इसे बाधित करने की कोई पूर्व योजना बनाई गई है?”
Deleted in SIR, four Bengal men now locked at Chhattisgarh detention centre for over a month
Sabir Sheikh (42), Safikul Islam (39), Nasiruddin Sheikh (35), and Laltu Sheikh (28) from Murshidabad
SIR process is to target Muslims illegally declare them Bangladeshi https://t.co/sh0B5zFbLf
— faizan (@faizan0008) October 7, 2026
लोकतंत्र और संविधान की दुहाई, सरकार पर साधा निशाना
छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने पुलिस कार्रवाई को “तानाशाही रवैया” करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था और पार्टी हमेशा महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के दिखाए अहिंसक मार्ग पर चलती आई है।
दिपके ने राज्य के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र का अपना एक गौरवशाली लोकतांत्रिक इतिहास रहा है, लेकिन वर्तमान में निष्पक्षता के बजाय राजनीतिक मंशा से पुलिस बल का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने मांग की कि कार्यकर्ताओं को बेवजह परेशान करने के बजाय प्रशासन चाहे तो उन्हें स्वयं गिरफ्तार कर ले।
मुख्य मांगें और आगे का घटनाक्रम
यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित होने वाले आंदोलन से जुड़ा है। सीजेपी का कहना है कि 10 अक्टूबर का यह विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होगा।
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस अधिकारियों का रुख है कि यह प्रक्रिया कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की जाने वाली एक सामान्य प्रशासनिक सावधानी है।
अब देखना यह होगा कि इन प्रशासनिक रुकावटों के बीच 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा किस तरह रूप लेता है।


